पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
 
 पहला पन्ना
 

 
 मुद्दा : उत्तराखंड 
नदी के लिए जंग
उत्तराखंड में इन दिनों नदियां संकट में हैं. राज्य की अलग-अलग नदियों पर बांध बनाने और उन्हें सुरंग में डालने की प्रक्रिया शुरु हो गई है. हालत ये है कि गंगा नदी को भी सुरंग में डाला जा रहा है. ऊर्जा के नाम पर चल रही इस कथित विकास प्रक्रिया के खिलाफ राज्य भर में लोग एकजुट हो रहे हैं और उन्होंने नदियों को बचाने के लिए कमर कस ली है.
उत्तराखंड से प्रसून लतांत की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : झारखंड 
ओ मैक्लुस्कीगंज !
कलकत्ता के व्यापारी मैक्लुस्की ने 1932 के आसपास जब बिहार के एक घने जंगलों वाले पठारी इलाके में एंग्लो इंडियन समुदाय की एक नई दुनिया बसाने की शुरुवात की तो मैक्लुस्की की आंखों में भी एक सपना था. लेकिन एंग्लो इंडियन समुदाय की अपनी दुनिया बसाने का मैक्लुस्की का सपना अधुरा रह गया. जिस मैक्लुस्कीगंज में कभी 400 के आसपास एंग्लो इंडियन परिवार थे, वहां 40 परिवार भी नहीं बचे.
मैक्लुस्कीगंज से रविवार संवाददाता की रिपोर्ट
     
 मुद्दा : श्रीलंका 
निशाने पर मीडिया
श्रीलंका में पत्रकारों पर लगातार बढ़ते हमले से मीडिया जगत सकते में है. चरमपंथी संगठनों और सरकार दोनों ही मीडिया को निशाना बना रहे हैं.
कोलंबो से हर्शी चितरंगी परेरा की रिपोर्ट
 
 मुद्दा : उत्तराखंड 
क्रूर समाज में एक मानवीय चेहरा
उत्तराखंड के भूस्खलन में दूसरों को बचाने की कोशिश में डॉक्टर विनोद जमलोकी स्वयं जीवन भर के लिए अपाहिज हो गए. उत्तराखंड के भूस्खलन प्रभावित लोगों की जुबानी पीयूष दईया की कलम से
     
 मुद्दा : मध्य प्रदेश 
जातीय पंचायत की बलि
अपने मुंहबोले भाई का अंतरजातीय विवाह कराना संगीता को भारी पड़ा और दोनों भाई-बहन जातीय पंचायत की बलि चढ़ गए
भोपाल से प्रशांत दुबे की रिपोर्ट
 
 बहस : छत्तीसगढ़ 
स्वयंवर में चुने गए राम
छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी परिवार ने अपनी बेटी के लिए स्वयंवर रचाया, जिसमें हज़ारों लोगों की भीड़ में आधुनिक राम को अन्नपूर्णा ने अपना वर चुना.
दुर्ग से नीरज की रिपोर्ट
 
     
 

 
     
 

 
     
 
       


   
 

राजेंद्र सिंह

 
 
जरुरी है गंगा को बचाना




click here

 
         
 राज्य : असम 
फिर बाढ़ उत्सव !
असम एक बार फिर बाढ़ में डूबा हुआ है. लेकिन बरसात के इस मौसम में कुछ लोग हैं, जिनके लिए यह बाढ़ उत्सव की तरह है. जो इस बाढ़ में डूब नहीं रहे, उबर रहे हैं. हर साल बाढ़ के नाम पर करोड़ों रुपए का वारा-न्यारा होता है और जब तक इनका हिसाब-किताब और जांच हो तब तक फिर से बाढ़ आ जाती है. जाहिर है, इस राज्य में बाढ़ से बचाव किसी की प्राथमिकता में नहीं है
गुवाहाटी से दिनकर कुमार की रिपोर्ट
 
 विचार : बात पते की 
आदिवासी, नक्सली और भारतीय लोकतंत्र
पिछले साठ सालों में लगातार हाशिये पर ढकेला गया भारत का आदिवासी समाज मौजूदा दौर में दो त्रासदियों का शिकार बन कर रह गया है. पहली यह कि राज्य ने अपने ही आदिवासी नागरिकों के प्रति अहसान भरा नज़रिया रखते हुए उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया है, और दूसरी यह कि उनके संरक्षक माने जाने वाले नक्सलियों के पास भी उनके लिए कोई दीर्घकालिक समाधान मौजूद नहीं है.
रामचंद्र गुहा का विश्लेषण
 
 बहस : बात पते की 
देश को ले डूबेगा परमाणु समझौता
भारत-अमरीका परमाणु समझौता लागू होने के बाद भी हमारी विद्युत क्षमता 2020 तक केवल 9 प्रतिशत बढ़ेगी. अमरीका ने पिछले तीन दशक में परमाणु ऊर्जा का एक भी नया कारखाना नहीं लगाया है और दुनिया के दूसरे देश भी इससे बच रहे हैं. असल में अमरीका इस समझौते की आड़ में भारत को अपना सैनिक अड्डा बनाना चाह रहा है और उसने अपनी संसद में ये कहा भी है
संदीप पांडेय का विश्लेषण
         
 कला 
किए कराए पर मुहर
हिंदी फ़िल्मों के निर्माता, निर्देशक अपना आत्म विश्वास खो बैठे हैं या किशोरावस्था में देखी फ़िल्में उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं. शायद इसलिए ही फ़िल्मों के रीमेक का कीड़ा उनके मन में कुलबुला रहा है
 
 राज्य : उड़ीसा 
अनूठा संपादक
छोटे से गांव में रहने वाले बिजय महापात्र को बाल पत्रिकाओं के संपादन का ऐसा जुनून है, जिसे लोगों ने प्रेम और पागलपन का नाम दे रखा है
 
 राज्य :  
प्रदूषण का घर पलक्कड
केरल का पलक्कड किसी समय अपनी सुरम्य वादियों के लिए जाना जाता था लेकिन अब यह प्रदूषण का घर बन कर रह गया है. इस इलाके की नदियों में पानी नहीं है और हवा में सिमेंट का जहर घुला हुआ है
             
 साहित्य : कविता 
मेरे न रहने पर
समय के तेज बदलाव में जिस तरह सब कुछ बदल रहा है, वह कहीं गहरे तक डराता है. कवि ने इसी बदलाव को महसूस किया है.
शहरोज़ की कविता
 
 साहित्य : भाषांतर 
आयी मुझ तक
पर्सियन कवि रुदाकी(874-940/41)की एक कविता का भाषांतर
 
 साहित्य : कहानी 
उसका चेहरा
जिसकी अपनी ज़मीन नहीं होती वह किसी तरह भी नहीं बचता. बस बचा हुआ-सा दिखता है. पेड़ों की अपनी ज़मीन होनी चाहिए, वे अकाल मौत मर रहे हैं.
रामकुमार तिवारी की कहानी

 
 कला : संस्मरण 
मेरे उस्ताद मेहदी हसन
पाकिस्तान से बाहर मेहदी हसन के पहले शिष्य ने अपने उस्ताद को याद करते हुए माना कि उनके उस्ताद के लिए संगीत आध्यात्म की तरह है
             
 

संजय काक

ईमान भी बहादुरी से कम नहीं

बशीर बद्र

अयोध्या राम की जन्मभूमि

हकु शाह

तेज तूं

तसलीमा नसरीन

मैं एक विश्व नागरिक

श्याम बेनेगल

परिवर्तन फिल्म का काम नहीं

 
 

  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2008 Vikalp, INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.co.in